Brain-Eating Amoeba – Dangerous Virus | फिर से इसने ली 1 जान |

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Truvanathpuram: शुक्रवार को अलाप्पुझा के पास पन्नवली जिले में रहने वाले मे रहने वाले 15 वर्षीय किशोर की मौत हो गई जो मस्तिष्क मे होने वाले दुर्लभ संक्रमण जिसका नाम अमीबिक मेनिंगोएन्सेफलाइटिस (Brain-eating amoeba) से प्रभावित था | शुक्रवार को राज्य मंत्री वीना जॉर्ज इस बात कि पुष्टि करते हुए राज्य मे पहले भी ऐसे पाँच मामले आए हुए थे |

पहली बार थिरुमाला वर्ड मे 2016 मे इस संक्रमण कि रिपोर्ट कि गई थी और 2019 – 20 मे भी मलप्पुरम मे भी दो- दो मामलों की पुष्टि की गई थी | इसके अलावा 2021 और 22 मे भी त्रिशूर और कोझिकोड मे  1 – 1 मामले सामने आए थे| राज्य मंत्री वीना जी ने कहा कि पहले भी इस संक्रमण के कारण सारे मरीजो कि डेथ हो गई थी | इस दुर्लभ संक्रमण से होने वाले मृत्यु कि दर 100% है |

हमारे देश के अलावा South Korea और America मे भी इस संक्रमण से ग्रसित 1-1 मरीज पाए गए थे, जो संक्रमण के 12 दिन डेथ कर गए |

आइए हम जानते है Brain-eating amoeba क्या होता है कैसे होता है और भी बहुत सारी जानकारी आपको यह मिलने वाली है |

Brain-Eating Amoeba

Brain-eating amoeba क्या होता है?

Brain-eating amoeba दिमाग को खाने वाले एमीबा का बहुत ही खतरनाक रूप है जो हमारे दिमाग में संक्रमण पैदा कर देता है | इसको हम एक तरह से वायरस भी बोल सकते है | इसी वायरस के विकराल रूप को नेग्लेरिया फावलेरी कहते है , इस वायरस के कारण हमारे Brain को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंच सकता है।

इस आर्टिकल में हम इस वायरस के बारे में विस्तार से आपको सभी जानकारी देंगे –

Brain-eating amoeba के कारण –

Doctors का मानना है ये खतरनाक amoeba ठहरे हुए पानी मे रहते है | जब इस तरह के दूषित पानी के संपर्क मे मानव आते है तब यह वायरस ज्यादातर नायक के जरिए हमारे शरीर मे प्रवेश कर जाते है जिसकी वजह से हम इस संक्रमण से ग्रसित हो जाते है और धीरे धीरे यह वायरस हमारे दिमाग मे प्रवेश करने लगता है|

किस तरह के स्थिर पानी मे यह संक्रमण होता है ?

ज्यादातर यह संक्रमण दूषित नदी, तालाब जिसमे पानी का temperature high होता है वहाँ यह Amoeba का बहुत ही खतरनाक रूप मे होता है इसके अलावा स्विमिंग पूल के पानी मे मिलता है, क्युकी स्विमिंग पूल मे बहुत सारे लोगों स्विमिंग करते है और कुछ लोग उसी पानी से अपने नाक को भी साफ करते और कुछ लोग तो स्विमिंग पूल मे टॉइलट भी करते है, जिसकी वजह से पानी दूषित हो जाता है, और पानी मे संक्रमण होने लगता है |

संक्रमण के लक्षण –

ब्रेन-खाने वाले एमीबा के संक्रमण के लक्षणों में नेत्रों में जलन, सिरदर्द, बात करने या सुनने में दिक्कत, मतली, उल्टी, गतिशीलता की कमी,अत्यधिक नाक बहना, और लकवा के समान लक्षण शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा भ्रम का होना भी  इन लक्षणों का विकास संक्रमित व्यक्ति के लिए जीवन खतरे का कारण बन सकता है।

संक्रमण होने के बाद शरीर मे क्या बदलाव आते है ?

इस Amoeba के संक्रमण के बाद सिर मे दर्द, उल्टी, बुखार होने लगता है क्युकी amoeba नायक के रास्ते दिमाग मे जाता है और धीरे धीरे उनकी संख्या को बढ़ाता है | ये अमीबा खुद को जिंदा रखने के लिए  हमारे दिमाग को ही खाना शुरू कर देते है | जब तक हम समझ पाए समय भी निकाल जाता है |

लक्षण दिखने के कितने दिन बाद तक बचाव किया जा सकता है ?

अगर सही समय पर पता चल जाए इन संक्रमण का तो शायद संक्रमित व्यक्ति को बचाया जा सकता है, पर Brain-eating amoeba के लक्षणों का पता सही समय पर नहीं चल पाता है |

Brain-eating amoeba का बचाव कैसे किया जा सकता है?

इस संक्रमण के बचाव के लिए अभी तक कोई भी specific इलाग नहीं है बस लक्षण के पता चलते ही डॉक्टर कि देख रेख मे रहना होगा | हो सकता है हमारे वैज्ञानिक जल्दी ही कोई न कोई medicine या vaccine बना पाए |

इसके अलावा आपको गंदे पानी को किसी भी तरह से इस्तेमाल करने से बचना है |

निष्कर्ष

आखि मे यही बोलना चाहूँगी Brain-eating amoeba के लक्षणों का पता सही समय पर नहीं चलता , तो बीमार या संक्रमित होने से अच्छा है हम सभी इस वायरस से खुद को जितना हो सके बचा कर रखे और दूषित पानी से भी जीतना दूर हो सके दूर ही रहे |

 


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